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जनवरी, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सलातो सलाम पड़ना कैसा है2⃣2⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 आखरी पोस्ट 22* ✏️ *फुक़्हा* - अल्लामा आलूसी रहमतुल्लाहि तआला अलैही फरमाते हैं कि हर किसी का एक क़िब्ला होता है जिसकी तरफ वो रुख करता है जैसे मुक़र्रबीन का क़िब्ला अर्श,रूहानियत का क़िब्ला कुर्सी,कर्रोबीन का बैतुल मामूर,अंबिया का बैतुल मुक़द्दस,और आप सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के जिस्म का क़िब्ला काबा और रूह का क़िब्ला अल्लाह की ज़ात,और अल्लाह फरमाता है कि ऐ महबूब मेरा क़िब्ला तेरी ज़ात है *📚 रुहुल मआनी,पारा 2,ज़ेरे आयत* *क़िब्ला जहत और तवज्जोह के मरकज़ को कहा जाता है अब अगर कोई कहे कि अल्लाह का क़िब्ला कोई कैसे हो सकता है तो उसको ये आयत पढ़नी चाहिए,फरमाता है कि* *कंज़ुल ईमान* - और ऐ महबूब तुम अपने रब के हुक्म पर ठहरे रहो कि बेशक तुम हमारी निगेहदाश्त में हो *📚 पारा 27,सूरह तूर,आयत 48* *👍 आखिरी पोस्ट ......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 2⃣1⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 21* ✏️ *ताजदारे हरम* *फुक़्हा* हज़रत अब्दुल मुत्तलिब फरमाते हैं कि मैं उस वक़्त काबे के पास ही मौजूद था जब हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की विलादत हुई तो मैंने देखा कि खानए काबा मेरे घर की जानिब इस क़दर झुक गया कि मानो किसी को सज्दा करता हो और मैंने ये आवाज़ सुनी कि नबीये मुकर्रम व मुख़्तार की विलादत हो गई आपके हाथो कुफ़्र शिकस्त खायेगा और वो काबे को बुतों से पाक करेंगे और सिर्फ एक मालिके हक़ीक़ी की इबादत का हुक्म देंगे *📚 शरह सलामे रज़ा,सफह 83* *आलाहज़रत अज़ीमुल बरकत रज़ियल्लाहु तआला अन्हु इसी सलाम में कुछ आगे फरमाते हैं*  *जिन के सज्दे को मेहराबे काबा झुकी* *उन भवों की लताफत पे लाखों सलाम* *और दूसरी जगह इरशाद फरमाते हैं कि* *हाजियों आओ शहंशाह का रौज़ा देखो* *काबा तो देख चुके काबे का काबा देखो* *अगली पोस्ट जल्द......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 2⃣0⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 20* ✏️ *फुक़्हा* फुक़्हा फरमाते हैं कि दीगर कायनात की तरह जन्नत भी हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के क़ब्ज़े में है तो उसमें से आप जिसको जितना चाहें अता कर सकते हैं *📚 मिरक़ात,जिल्द 1,सफह 55* *हदीस* एक मर्तबा हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने सूरज ग्रहण की नमाज़ पढ़ाई,दौराने नमाज़ आपने अपने हाथों में कुछ पकड़ा और फिर छोड़ दिया,बाद नमाज़ जब सहाबा ने दरयाफ्त किया तो आप फरमाते हैं कि मैंने जन्नत के खोशे में से एक खोशा पकड़ा अगर मैं उसे तोड़ लेता तो तुम क़यामत तक उसे खाते रहते *📚 मुस्लिम,जिल्द 1,सफह 636* *हदीस* - हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम एक खुश्क तने पर खड़े होकर खुत्बा दिया करते थे जब मस्जिदे नब्वी शरीफ में मेंबर बना तो उसे वहां से हटा दिया गया जिस पर वो ज़ारो क़तार रोने लगा कि उस बेजान दरख़्त की आवाज़ सबने सुनी,हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने उससे कहा कि अगर तू चाहे तो मैं फिर से तुझे तारो ताज़ा कर देता हूं और अगर तू चाहे तो मैं तुझे जन्नत में लगा देता हूं जहां तू जन्नत के पानियों से सैराब होगा और तेरा फल औलिया व अंबि...

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 1⃣9⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 19* ✏️ *शहरे यारे इरम ताजदारे हरम*            *नौबहारे शफाअत पे लाखों सलाम* शहरे यारे इरम = जन्नत के बादशाह ताजदार = मालिक,साहिब हरम = काबा नौ बहार = नई रौनक शफाअत = गुनहगारों की सिफारिश करना *शहरे यारे इरम* *फुक़्हा* रोज़े क़यामत रिज़वाने जन्नत अहले महशर से खिताब करते हुए फरमायेंगे कि मुझे अल्लाह तआला ने जन्नत की चाभियां मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के सुपुर्द करने का हुक्म दिया है *📚 मदारिजुन नुबूवत,जिल्द 1,सफह 266* *हदीस* हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि करामात व बुज़ुर्गी हम्द का झंडा और जन्नत की चाभियां क़यामत के रोज़ मेरे हाथों में होगी *📚 तिर्मिज़ी,जिल्द 4,सफह 36* *अगली पोस्ट जल्द......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 1⃣8⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 18* ✏️ *अंबिया अज्ज़ा हैं तू बिल्कुल है जमला नूर का* *इस इलाक़े से है उन पर नाम सच्चा नूर का* *ये जो महरो मां पे है इतलाक़ आता नूर का* *भीख तेरे नाम की है इस्तेआरा नूर का* *गुले बाग़े रिसालत* किसी भी बाग़ की ज़ीनत उसके फूलों से होती है तो इस दुनियाये बाग़ की ज़ीनत अंबिया अलैहिस्सलाम से है और उन्हीं से इस बाग़ की बहार है मगर खुद बाग़ का वजूद हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ज़ात से है,आपकी तशरीफ आवरी से पहले बहुत सी बहार आई मगर उन्हें खिज़ा ने आ लिया मगर आपके आने से ऐसी बहार आई कि उसपर खिज़ा का कोई असर न हो सका और आपके ही वजूद अक़दस से बाग़ में ऐसा फूल खिला कि फिर किसी और फूल की ज़रूरत ही न रही और उसी से पूरी बाग़ की रौनक रही कि अल्लाह ने आपको खातिमुन नबिय्यीन बनाकर भेजा,आलाहज़रत अज़ीमुल बरकत रज़ियल्लाहु तआला अन्हु दूसरी जगह युं इरशाद फरमाते हैं *न रखी गुल के जोशे हुस्न ने गुलशन में जां बाक़ी* *चटकता फिर कहां गुंचा कोई बाग़े रिसालत का* *📚 शरह सलामे रज़ा,सफह 72-79* *अगली पोस्ट जल्द......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

सलातो सलाम पड़ना कैसा है1⃣7⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 17* ✏️ *लफ्ज़ सिराज अगर चे 2 मायनों में आता है चिराग़ और सूरज मगर यहां मुख़्तार मायने सूरज ही है क्योंकि क़ुर्आन में सूरज का लक़ब सिराज और चांद का लक़ब नूर दूसरी जगह भी आया है फरमाता है* *कंज़ुल ईमान* और उनमें चांद को रौशन किया और सूरज को चिराग़ *📚 पारा 29,सूरह नूह,आयत 16* *कंज़ुल ईमान* और उनमें चिराग रखा और चमकता चांद *📚 पारा ,सूरह फुरक़ान,आयत 61* *लुग़त में वहज के मायने नूर मय हरारत के है जो रौशन भी हो और गर्म भी हो चुंकि सूरज बेहद रौशन भी है और निहायत गर्म भी इसलिए उसको वहाज कहा गया,लेकिन रूहानी आफताब को सिराज कहकर वहज की जगह मुनीर फरमाया जो कि चांद की सिफत है जिसमे रौशनी तो है मगर गर्म नहीं बल्कि ठंडा है,तो मतलब ये हुआ कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ज़ाते नब्वी में रौशनी तो सूरज सी है मगर ठंडक चांद की है कि अगर ऐसा न होता तो हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के चेहरे पर निगाह रखने की किसी को जुर्रत न होती,सब जानते हैं कि ज़िन्दगी का वुजूद सूरज से भी है अगर उसकी रौशनी और तपिश और हरारत न हो तो न तो दुनिया में रौशनी बा...

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 1⃣6⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 16* ✏️ *महरे चर्खे नुबूवत पे रौशन दुरूद*            *गुले बाग़े रिसालत पे लाखों सलाम*  महर = सूरज, चर्ख = आसमान, गुल = फूल, रिसालत = पैग़म्बरी मतलब ये कि आपकी ज़ाते अक़दस आसमाने नुबूवत का ऐसा चमकता हुआ सूरज है कि उसके निकलने के बाद बाग़े रिसालत में किसी और फूल के खिलने की गुंजाईश न रही *महरे चर्खे नुबूवत* अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के औसाफ बयान करते हुए फरमाता है कि *कंज़ुल ईमान* ऐ ग़ैब की खबरें बताने वाले बेशक हमने तुम्हे भेजा हाज़िर व नाज़िर और खुशखबरी देता और डर सुनाता और अल्लाह की तरफ से उसके हुक्म से बुलाता और चमका देने वाला आफताब *📚 पारा ,सूराह अहज़ाब,आयत 45-46* *अगली पोस्ट जल्द......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 1⃣5⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 15* ✏️ *दुरूदे सआदत* जो कोई ये दुरूद एक बार पढ़ेगा उसे 6 लाख दुरूद पढ़ने का सवाब मिलेगा *📚 दलाईलुल खैरात,सफह 101* *अगर पेश करना चाहूं तो ऐसी ऐसी फज़ीलतो पर कई पोस्ट बना सकता हूं मगर समझाने के लिए इतना ही काफी है कि रब की बारगाह में किसी चीज़ की कोई कमी नहीं है जब वो एक बार क़ुल हुवल्लाह शरीफ पढ़ने पर 10 पारों का सवाब अता करता है जब 1 बार दुरूद पढ़ने पर 6 लाख दुरूद का सवाब अत करता है तो उसी तरह एक बार ये कहने पर कि मुस्तफा जाने रहमत पे लाखों सलाम तो वो हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की बारगाह में लाखों सलाम पहुंचा भी देगा और हमें लाखों सलाम पढ़ने का सवाब भी अता कर देगा इन शाअ अल्लाह तआला* *अगली पोस्ट जल्द......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 1⃣4⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 14* ✏️ *अब उनको हदीस सुनाने के बाद मैंने उनसे कहा कि अगर हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के इतना पूछ लेने से कि दरवाज़े पर कौन है तो वो ग़ैबदां नहीं रहे तब तो यही हुक्म आपको खुदा पर लगा देना चाहिए कि वो भी बा रहां फरिश्तों से पूछता है क्या कर रहे थे कहां से आ रहे हो वो क्या मांग रहे थे वगैरह वगैरह कि आपके नज़दीक तो अब खुदा भी ग़ैबदां नहीं रहा मआज़ अल्लाह तो इसका जवाब न तो उनके पास था जो वो मुझे देते और न दुनिया के किसी वहबी के पास है कि इसका जवाब दे सके खैर आपको बताता हूं कि इसके 2 जवाब हैं पहला तो ये कि कुछ बातें फितरी तौर पर कही जाती है जैसे कि कौन क्या कैसे कहां कब वगैरह वगैरह कि अगर चे आप कुछ बातें आप जानते भी हों तब भी उसूलन उसे पूछा ही जाता है,मसलन आपने किसी को बुलाया वो दरवाज़े पर आया दस्तक दी आपको यक़ीनी तौर पर पता है कि वही होगा पर भी पूछते हैं कि कौन घर में आपको पता है कि क्या पक रहा है फिर भी पूछते हैं कि क्या पका है,दोस्त के साथ कहीं जाने को निकले पता है कि कहां जाना है फिर भी पूछते हैं तो पूछना एक फितरी बात है ...

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 1⃣3⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 13* ✏️ *हदीस* हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि अल्लाह के कुछ फरिश्ते हैं जिनके ज़िम्मे सिर्फ यही काम है कि वो पूरी दुनिया की सैर करते रहते हैं और जहां कोई ज़िक्रे खैर मिला वहां उतर कर पूरी महफ़िल को अपने परों के साये में ले लेते हैं और ज़मीन से लेकर आसमान तक वो पूरी जगह को भर देते हैं जब तक कि वो महफिल बर्खास्त न हो जाये,फिर जब वो लोग वहां से उठ जाते हैं तो ये फरिश्ते भी वहां से चल देते हैं और रब की बारगाह में पहुंचते हैं मौला पूछता है कि कहां से आ रहे हो हालांकि वो सब जानता है फिर भी पूछता है,तो फरिश्ते अर्ज़ करते हैं कि एक जगह कुछ लोग तेरा ज़िक्र कर रहे थे और तुझसे कुछ तलब कर रहे थे तो रब पूछता है कि क्या मांग रहे थे तो फरिश्ते कहते हैं कि वो जन्नत मांग रहे थे तो मौला फरमाता है कि क्या उन्होंने जन्नत देखी है तो फरिश्ते कहते हैं कि नहीं तो मौला फरमाता है कि अगर देख लेते तो,तो फरिश्ते कहते हैं कि फिर वो और ज़्यादा उसके तलबग़ार होते फिर मौला पूछता है कि और क्या कह रहे थे तो फरिश्ते कहते हैं कि जहन्नम से पनाह ...

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 1⃣2⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 12* ✏️ *लाखों सलाम* एक लफ्ज़ में लाखों सलाम भेजना ये भी शाने आलाहज़रत है *इसपर अक्सर मोअतरिज़ ऐतराज़ करता है एक लफ्ज़ में लाखों सलाम कह दिया तो लाखों सलाम पहुंच जायेगा क्या,वैसे तो ऐतराज़ करने वाला हर बात में ही ऐतराज़ करता है क्योंकि उसका काम ही ऐतराज़ करना है और जब बात हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की होती है तब उसका ऐतराज़ कुछ ज़्यादा ही बढ़ जाता है,ऐसे लोगों की मिसाल उल्मा उस मक्खी से देते हैं जो पूरा खूबसूरत जिस्म छोड़कर ज़ख्म पर ही बैठा करती है उसी तरह ये मोअतरिज़ भी सालिहीन की लाखों करोड़ो खूबियों को छोड़कर सिर्फ उन बातों पर जोर देते हैं जिनमें कहीं से उन्हें कोई नुक्स का पहलु मिल जाये,अब जब ऐसा कोई पहलू नहीं निकलता तो लगते हैं मनघडंत बातें बनाने और ऐसी ऐसी बेढंगी बात करते हैं कि जिसका न कोई सर होता है और न पैर कि आदमी सुने तो अपना सर धुनता रहे,जैसे कि बहुत पहले की बात है कि एक साहब ने मुझसे एक हदीस सुनाकर कहा कि हदीस युं थी कि सहाब-ए किराम में से कोई हज़रात हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के दरवाज़े पर दस्तक देते हैं तो अंद...

सलातो सलाम पड़ना कैसा है1⃣1⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 11* ✏️ फिर दाग़ देहलवी हुज़ूर हुज्जतुल इस्लाम से कहते हैं कि अब जब आपके अब्बा हुज़ूर कोई कलाम लिखें तो मुझे ज़रूर दिखायें और मेरे आलाहज़रत तो फिर आलाहज़रत ठहरे आपको ज़रूर ज़रूर इस बात का इल्म अल्लाह ने करा दिया होगा जब ही तो उसके बाद आपने एक कलाम लिखा *उनकी महक ने दिल के गुन्चे खिला दिए हैं* *जिस राह चल गए हैं कूचे बसा दिए हैं*              सरकारे आलाहज़रत ने कलाम तो पूरा लिखा मगर मक़्तअ यानि जिसमें शायर का तखल्लुस इस्तेमाल होता है वो छोड़ दिया हुज़ूर हुज्जतुल इस्लाम उसी हालत में वो कलाम लेकर दाग़ देहलवी के पास पहुंचे और आपको दिखाया उन्होंने पूरा कलाम पढ़ा और बे इख़्तियार होकर कहते हैं कि इसका मक़्तअ मैं लिखे देता हूं और लिखते हैं *मुल्के सुखन की शाही तुमको रज़ा मुसल्लम* *जिस सिम्त आ गए हो सिक्के बिठा दिए हैं*              मुल्क मायने जहान दुनिया सुखन मायने शेरो शायरी की दुनिया शाही मायने बादशाहत मुसल्लम मायने उसके क़ाबिल होना और दूसरे मिसरे में तो दाग़ देहलवी...

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 1⃣0⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 10* ✏️ *मैं इस सलाम से जुड़ा हुआ एक वाक़िया बयान कर रहा था कि*             इश्क़े मिजाज़ी के एक शायर हैं दाग़ देहलवी एक दिन उनकी महफिल जमी हुई थी अचानक उनके सामने ये कलाम आ गया मुस्तफा जाने रहमत पे लाखों सलाम दाग़ देहलवी बहुत देर तक उसको हैरत से तकते रहे काफी देर के बाद मचल कर बोले कि भाई ये कलाम किसका है इत्तेफाक़ से उसी महफिल में शहज़ादये आलाहज़रत हुज़ूर हुज्जतुल इस्लाम इमाम हामिद रज़ा खान रज़ियल्लाहु तआला अन्हु भी मौजूद थे आपने फरमाया कि बरेली के एक मौलाना है उन्ही का ये कलाम है जो कि मेरे वालिदे गिरामी हैं फिर आपने उनसे पूछा कि क्या इसमें कुछ कमी नज़र आई तो दाग़ देहलवी कहते हैं कि नहीं बल्कि मौलाना होकर ऐसा कलाम लिखते हैं तअज्जुब है उनका कहने का मतलब ये था कि मौलाना होकर इश्क़ के रंग में इतनी बड़ी कह डाली मुस्तफा जाने रहमत यानि तमाम आलम की जान क्योंकि इश्क़े मिजाजी के शायर ही अपने महबूब को अक्सर जान रूह ज़िन्दगी व चांद सूरज सितारे आसमान ज़मीन हरियाली वादियां समंदर हूर परी वगैरह चीज़ों से तश्बीह दिया करते है...

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 9⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 09* ✏️ चुंकि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम क़यामत तक अपनी उम्मत में मौजूद हैं लिहाज़ा आपके वुजूदे अक़दस की वजह से वैसा अज़ाब कभी इस उम्मत पर नहीं आ सकता जैसा कि पहले की उम्मतों पर आया करता था मेरे आलाहज़रत इसी मक़ाम को याद करते हुए और मुसलमानों को मुबारक बाद देते हुए फरमाते हैं कि *अंता फ़ीहिम ने अदु को भी लिया दामन में* *ऐशे जावेद मुबारक तुझे शैदाइये दोस्त* यानि जब हुज़ूर काफिरों के लिए भी रहमत बनकर आ गए तो फिर उनके ग़ुलामों का क्या कहना और उन्हें क्यों उनकी रहमत का हिस्सा न मिलेगा तो जब कायनात की हर शय के लिए हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम रहमत हैं तो मानना पड़ेगा कि हर शय का वजूद आप ही के वजूद का मरहूने मिन्नत है जैसा कि मैं पीछे बयान कर आया और बहुत कुछ बयान करना बाक़ी है मगर बात बहुत लम्बी हो जायेगी क्योंकि अभी पहले शेअर के पहले मिसरे की भी शरह मुकम्मल नहीं हो पाई है तो आगे बढ़ते हैं  *अगली पोस्ट जल्द......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 8⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 08* ✏️ *काफिरों पर रहमत* मुसलमानों पर उनकी रहमत है ये तो सभी जानते मानते और समझते हैं मगर काफिरों पर कैसे उनकी रहमत है देखिये,पहले की उम्मतों पर उनके नबी की इताअत न करने पर फौरन अज़ाब आ जाता था और पूरी की पूरी बस्ती व इलाक़ा आन की आन में तबाहो बर्बाद हो जाता था,मगर हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की आमद के बाद से किसी पर भी अज़ाब मुसल्लत नहीं किया गया जैसा कि खुदाये तआला क़ुर्आन में इरशाद फरमाता है कि *कंज़ुल ईमान* और जब (काफिर) बोले कि ऐ अल्लाह अगर यही (क़ुर्आन) तेरी तरफ से हक़ है तो हम पर आसमान से पत्थर बरसा या कोई दर्दनाक अज़ाब हम पर ला *(तो मौला तआला इसके जवाब में इरशाद फरमाता है कि)* और अल्लाह का काम नहीं कि उन्हें अज़ाब करे जब तक कि ऐ महबूब तुम उनमे तशरीफ फरमा हो *📚 पारा 9,सूरह ऐराफ,आयत 32-33* *अगली पोस्ट जल्द......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 7⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 07* ✏️ *जिब्रील पर रहमत* हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम फरमाते हैं कि या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मैं इब्लीस के अंजाम की वजह से खौफ में रहता था मगर जब से आप पर नाज़िल कर्दा कलाम में मेरे बारे में ये फरमाया गया है कि वो साहिबे क़ुव्वत अर्श के पास रहता है वो मुत्तबये और अमीन है तबसे मैं बे खौफ हो गया हूं *📚 शिफा,जिल्द 1,सफह 19* *अर्शे आज़म पर रहमत* शबे मेअराज अर्शे आज़म ने हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का दामन पकड़ कर कहा कि या रसूल अल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम मैं अल्लाह की सबसे बड़ी खल्क़ हूं मगर जबसे मैं पैदा हुआ उसकी इज़्ज़तो जलाल से लरज़ रहा था फिर मुझपर *ला इलाहा इल्लल्लाह* लिखा गया तो मेरी हैरत व इज़्तिराब और बढ़ गई फिर जब *मुहम्मदुर रसूल अल्लाह* सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम लिखा गया तो मेरी बेचैनी दूर हुई कि आपका नाम मेरे लिए सूकूनो इत्मिनान का सबब है और आपकी वजह से ही मेरे बारे में लोगों का अक़ीदा दुरुस्त हो गया कि पहले वो मुझे ज़ाते बारी का मुहीत समझते थे पर आपने तालीम दी कि अल्लाह के लिए कोई शय मुह...

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 6⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 06* ✏️ रहमत अब हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम रहमत हैं तो किस किस के लिए रहमत हैं तो इसके जवाब में अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त क़ुर्आन में इरशाद फरमाता है कि *कंज़ुल ईमान* और हमने तुम्हें न भेजा मगर रहमत सारे जहान के लिए *📚 पारा 17,सूरह अम्बिया,आयत 107* *तफसीर* यहां आलमीन से मुराद तमाम मखलूक़े खुदा मुराद है यानि जिस जिस शय का रब अल्लाह है हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम उसके लिए रहमत हैं तो ये कहना कि आप सिर्फ इंसानो और जिन्नातों के लिए ही रहमत हैं हरगिज़ दुरुस्त नहीं *📚 रुहुल मआनी,जिल्द 17,सफह 197* *📚 शरह शिफा,जिल्द 1,सफह 38* *📚 जवाहिरूल बहार,जिल्द 1,सफह 285* *अगली पोस्ट जल्द......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

सलातो सलाम पड़ना कैसा है5⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 05* ✏️ *अब ज़रा चलते चलते इन मुनाफिकों के इमाम का भी एक क़ौल मुलाहज़ा कर लें रशीद अहमद गंगोही ने एक सवाल के जवाब में लिखा* *(12)* ताज़ीमे दीनदार को खड़ा होना दुरुस्त है *📚 फतावा रशीदिया, जिल्द 1, सफह 54* *और अशरफ अली थानवी के पीरो मुर्शिद हाजी इम्दाद उल्लाह मुहाजिर मक्की लिखते हैं* *(13)* और मशरब फ़क़ीर का ये है कि महफिले मिलाद में शरीक होता हूं बल्कि ज़रियये बरकात समझ कर हर साल मुनक़्क़िद करता हूं और क़याम में लुत्फ़ो लज़्ज़त पाता हूं *📚 फैसला हफ्त मसला, सफह 111* *👉 पीर को तो सलाम पढ़ने में लुत्फ़ मिल रहा है और मुरीद हराम और शिर्क का फतवा दे रहा है अल्लाह जाने इनके यहां दीन किस चीज़ का नाम है* *अगली पोस्ट जल्द......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 4⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 04* *✏️ इन तमाम बातों पर भी ज़रा ग़ौर करें* *मजिस्ट्रेट आ जाये तो खड़े हो जाओ* *कमिश्नर आ जाये तो खड़े हो जाओ* *M.L.A आ जाये तो खड़े हो जाओ* *C.M आ जाये तो खड़े हो जाओ* *P.M आ जाये तो खड़े हो जाओ* मगर नबी की ताज़ीम को जैसे ही सुन्नी ने खड़े होकर सलाम पढ़ा कुछ दोगलों के मज़हब में हराम और शिर्क हो गया इसी लिए मेरे आलाहज़रत फरमाते हैं कि *शिर्क जिसमे होवे ताज़ीमे हबीब उस बुरे मज़हब पे लानत कीजिये* रब जिस पर दुरूद भेजे शजरो हजर जिसपर सलाम पढ़ें जानवर जिनको सजदा करें हम अपने उसी नबी की बररगाह में ''मुस्तफा जाने रहमत पे लाखों सलाम'' पढ़ लें तो इतनी क़यामत कि अल्ल्लाह अल्लाह क्या अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने सलाम पढ़ने पर अलफ़ाज़ में कोई क़ैद लगाई है कि ऐसे पढ़ो और ऐसे न पढ़ो जब उसने कह दिया पढ़ो तो जो जिस ज़बान में पढ़ेगा उसी का हुक्म अदा करेगा *अगली पोस्ट जल्द......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 3⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 03* ✏️ *(9)* हज़रते मौला अली रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु ने फ़रमाया कि मैं नबीये करीम सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम के हमराह मक्का में था फिर सरकारे अक़दस और मैं मक्का शरीफ के गिर्द अंवाह में गए तो जिस पहाड़ और दरख़्त का भी सामना होता तो वो बा आवाज़ बुलन्द अर्ज़ करता ''अस्सलामो अलैका या रसूल अल्लाह" *📚 तिर्मिज़ी, जिल्द 2, सफह 203* *👹 और अब मुनकिर ये कहेगा कि सलाम पढ़ना तो फिर भी ठीक है मगर क़यामे ताज़ीमी हराम है तो ग़ैरुल्लाह की ताज़ीम यानी क़याम पर भी दलील मुलाहज़ा करें* *(10)* जब हज़रत सअद रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु मस्जिदे नबवी शरीफ में दाखिल हुए तो हुज़ूर सल्लललाहो अलैहि वसल्लम ने अनसार को हुक्म दिया की 'क़ूमू इला सय्येदेकुम' यानि अपने सरदार के लिए खड़े हो जाओ *📚 मिश्क़ात, जिल्द 1, बाबुल जिहाद* *(11)* ख़ातूने जन्नत हज़रत फ़ातिमा ज़ुहरा रज़ी अल्लाहु तआला अन्हा के आने पर नबी करीम सल्ल्ललाहो तआला अलैही वसल्लम फ़ौरन खड़े हो जाते और आपकी पेशानी चूमकर अपनी मसनद पर बिठाते *📚 मिश्क़ात, किताबुल अदब, बाबुल मुसाफा* *👉 अगर क़यामे ताज़ीमी ह...

Huzoor ‎ﷺ ‏Par Salam Sabse Pehle Kisne Padha ‎

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🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 Huzoor ﷺ Par Salam Sabse Pehle Kisne Padha 🥀* ✏️ Wahabre Deobandi Ahle'hagees Saudi Najdi Log Salam Se Bahut Chidte Hai Aur Isko Padhne Ko Bid'at Haram Kehte Hai *Maaz'Allah* *Hazrat Imam Ibn e Hajar Makki Al Mutawaffah 974 Hijri Likhte Hain* Jab Allah ﷻ Ne Hazrat Adam عليه السلام Ki Left Rib (Pasli) Se Hazrat Sayyeda Hawwa رضي الله عنها Ko Paida Kiya Tu Jab Hazrat Adam عليه السلام Ne Unko Dekha Aur Unko Chohne Chaha Tu Farishto Ne Aapko Rok Diya Aur Kaha Ke *Pehle Aap Rasool Allah ﷺ Par 3 Martaba Ek Riwayat Me Hai 20 Martaba Salam Padhe* Subhan'Allah 👉 To Pta Chala Ke Salam Padhna Huzoor ﷺ Par Ye Hazrat Adam عليه السلام Ki Sunnat Hai *Ab Ye Mat Kehna Ke Hazrat Adam Bhi Barelvi Thay* 🤣 *📚 Reference Book* *Al Nematul Al Kubra [English] Page 18* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴* *👇 Scan Page 👇*

*📇 मुस्तफा जाने रह़मत पे लाखों सलाम जब एक बार पढ़ा तो लाखों सलाम कैसे पहुंचेगा*

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ* *🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ* *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *🧮 पोस्ट 65▪️* *📝 सवाल-;* *📇 मुस्तफा जाने रह़मत पे लाखों सलाम जब एक बार पढ़ा तो लाखों सलाम कैसे पहुंचेगा* *✍️ जवाब -;* *📇 अगर ये एतराज़ है तो दर अस्ल ये एतराज़ खुदा पर है इसको यूं समझये कि मैंने आप से सलाम किया अस्सलामु अलैकुम यानि कि सलामती हो तुम पर अब ये बतायें मैंने कह तो दिया मगर ये सलामती आप पर नाज़िल कैसे होगी और कौन नाज़िल फरमायेगा ज़ाहिर सी बात है अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ही सलामती फरमाने वाला है उसी के फज़्ल से आप सलामत रहेंगे तो हमारा नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की बारगाह में लाखों सलाम भेजना या करोड़ों दुरुद भेजना दर अस्ल रब की बारगाह में दुआ है कि मौला मेरे नबी की बारगाह में मेरा लाखों सलाम पहुंचा तो अब बताइये रब पहुंचा सकता है या नहीं अगर हाँ तो एतराज़ दफा यानि कि खत्म हो गया और अगर नहीं तो फिर आपको अल्लाह की क़ुदरत पर भरोसा ही नहीं है आपका ईमान खतरे में है जनाब अरे भाई एक नही...

Kya Huzoor ‎ﷺ ‏Door Se Salam Sunte Hai Our Jawab Bhi Dete Hai ‎

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🖼ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ* *السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ🖼* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला..* *🕋 الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ 🕋* *👉 post 176 ✔️*  *📝SAWAL-:* *📇 Kya Huzoor ﷺ Door Se Salam Sunte Hai Our Jawab Bhi Dete Hai* *✍️ JAWAB-;* *📇 Ek Sahabi Ne Huzoor ﷺ Ko Makkah Se Salam Kiya Huzoor ﷺ Ne Madinah Se Jawab Diya Hazrat Imam Bayhaqi Al Mutawaffah 458 Hijri Hadith Code Karte Hazrat Khubayb Bin Adi رضي الله عنه Ko Makkah Me Jab Mushriko Ne Qaid Kar Liya Aur Soli Par Chada Diya To Hazrat Khubayb Bin Adi رضي الله عنه Ne Waha Se Rasool Allah ﷺ Par Akhiri Salam Bheja Salam Alayka Ya Rasool Allah ﷺ Aur Madine Se Rasool Allah ﷺ Ne Uska Jawab Diya* *📚 Dalail un-Nabuwwah Vol 3 Page 331* *👉 NOTE; Yani Sahabi Makkah Me Aur Huzoor ﷺ Madinah Shareef Me Jo 450.km Dor Hai Lekin Sahabi Ne Salam Kiya Aur Aaqa ﷺ Ne Sun Bhi Liye Aur Jawab Bhi Diya Yani Sahabi Ka Aqeed...

सलातो सलाम पड़ना कैसा है 2⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 02* ✏️ *(4)* नूह पर सलाम हो जहां वालों में *📚 पारा 23, सूरह साफ़्फ़ात, आयत 79* *(5)* सलाम हो इब्राहीम पर *📚 पारा 23, सूरह साफ़्फ़ात, आयत 109* *(6)* सलाम हो मूसा और हारून पर *📚 पारा 23, सूरह साफ़्फ़ात, आयत 120* *(7)* सलाम हो इल्यास पर *📚 पारा 23, सूरह साफ़्फ़ात, आयत 130* *(8)* और सलाम है पैगम्बरों पर *📚 पारा 23, सूरह साफ़्फ़ात, आयत 181* *👉 खुद रब्बे ज़ुल्जलाल ने तो सारे अम्बिया पर ही सलाम पढ़ डाला मगर पता नहीं कि अन्धे और कोढियों की कौन सी क़ुरान है जिसमे सलाम पढ़ने को हराम और शिर्क लिखा गया है बात तो यहीं पर ख़त्म हो जानी चाहिए मगर अब जब शुरू किया है तो पूरी कर ही दूं* *अगली पोस्ट जल्द......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*

Hamara Salam Huzoor ‎ﷺ ‏Ki Bargah Me ‎

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🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 Hamara Salam Huzoor ﷺ Ki Bargah Me 🥀* ✏️ Wahabiyon Deobandiyo Ahle'hageeso Najdiyo Ke Dharam Me Huzoor ﷺ Par Salam Padhna Sirrak Haram Hai Aur Jo Padte Hai Mushrik Hai *Astagfirullah* Hazrat Imam *Ahmad* Bin Hambal Al Mutawaffah *241* Hijri Hadith Code Karte *Hazrat Abdullah Bin Mas’ood رضي الله عنه Se Riwayat Hai Rasool Allah ﷺ Ne Farmaya Zameen Me Allah Ke Kuch Farishte Ghumte Phirte Hai Aur Meri Ummat (Barelviyon) Ka Salam Mujhe Pauchate Hai* Subhan'Allah 👉 Huzoor ﷺ To Farma Rahe Hai Ki Mujhpar Salam Padho Aur Tumhara Salam Farishte Lekar Meri Bargah Me Aate Hai *Aur Wahabra Deobandi Jamati Molvi urf Polvi Kehta Hai Salam Padhna Sirrak Haram* (Maaz'Allah)  📚 Reference Book *Musnad Ahmad Bin Hambal Vol 3 Hadees 3666* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴* *👇 Scan Page 👇*

‏हुज़ूर ‎صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّم ‏पर सलाम यहां से पढ़े या मदीना जाकर* ‏

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ* *🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ* *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *🧮 पोस्ट 64▪️* *📝 सवाल-;* *📇 हुज़ूर صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّم पर सलाम यहां से पढ़े या मदीना जाकर*  *✍️ जवाब-;* *📇 अब्दुल्लाह इब्ने मसऊद रदियल्लाहो तआला अन्हु से मरफुअन मरवी है के अल्लाह के कुछ फरिश्ते ज़मीन में घूमते फिरते है और मेरी उम्मत की तरफ से भेजा जाने वाला सलाम मुजे पहोचाते है* 📚 *अल सिलसिला तुस सहिहा-हदीस नं 3424 - शेख नासिरुद्दीन अल्बानी* *👉 नोट; कुछ लोग यह ऐतराज़ करते है यहां से सलाम मत पढ़ो बल्के सिर्फ मदीना हुज़ूर صَلَّى اللّٰهُ عَلَيْهِ وَسَلَّم के रोज़ ए अनवर पर हाज़िर होकर वहा ही पढ़ो इस हदीस में जवाब है कि हम जहा से भी हुज़ूर पर दुरुदों सलाम पढ़ते है फरिश्ते दुरुदों सलाम हुज़ूर तक पहोचा देते है* ________________________ ________________________ *💉 अपनी औलादो में आला हजरत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।* *💓 हैं पुश्...
*وعلیکم السلام ورحمتہ اللہ وبرکاتہ* *✏️ Jo Molvi Aisa Bolta Hai Wo Devbandi Wahabi Nahi To SULHEKULLE Zarur Hai Kiuki Nabi-e-Kareem ﷺ Ki Bargha Me Salat o Salam Padhne Ka Koi Waqt Muqarrar Nahi Our Koi Jagha Muqarrar Nahi Jab Chahe Jaha Chahe Padh Sakte Hai Lehaza Is Tarha Ke SULHEKULLI Molvi Se Door Rahe Aur Ouma e Haq Yani MASLAKE AALA HAZRAT Par Qayam Rahe* *Is Talluq Se Hawala Niche Dekhe* 👇👇👇👇👇👇

Kya Masjid Me Sallat O Sallam Parhna Bid'at Hai

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🖼ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ* *السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ🖼* *अल्लाह के नाम से शुरू जो बहुत मेहरबान रहमत वाला..* *🕋 الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ 🕋* *👉 post 175 ✔️*  *📝SAWAL-:* *📇 Kya Masjid Me Sallat O Sallam Parhna Bid'at Hai* *✍️ JAWAB-;* *📇 Hazrat Alqamah RadiyAllahu Ta’ala ‘Anhu Bayaan Karte Hain Ki Jab Woh Masjid Me Daakhil Hote The To Kehte The* *اَلسَّلَامُ عَلَيْکَ أَيُهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اﷲِ وَبَرَکَاتُهُ صَلَّی اﷲُ وَمَـلَاءِکَتُهُ عَلٰی مُحَمَّدٍ صَلَّى اللهُ تَعَالىٰ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ*   *Aye Nabi e Mohtashim Aap Par Salaamati Ho Aur Allah Ta’ala Ki Rahmat Aur Barkaat Ho (Hamesha) Allah Ta’ala Ki Taraf Se Rahmat Aur Us Ke Firishto’n Ki Taraf Se Bhi Muhammad Mustafa ﷺ Par Duroor Wa Barakaat Ho* *📚 Ibn Abi Shaybah Fi Al-Musannaf Hadees 3417* ________________________ -------------------------------------- *⚔ SULHE KULLI NABI KA NAHI SUNNIYO ...

सलातो सलाम पड़ना कैसा है1⃣

 🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀* *💓 पोस्ट 1* ✏️ *(1)* कंज़ुल ईमान - बेशक अल्लाह और उसके फरिश्ते दुरूद भेजते हैं उस ग़ैब बताने वाले नबी पर, एै ईमान वालों उनपर दुरूद और खूब सलाम भेजो *(1)* तर्जुमा थानवी - बेशक अल्लाह और उसके फ़रिश्ते रहमत भेजते हैं इन पैगम्बर पर, ऐ ईमान वालो तुम भी आप पर रहमत भेजा करो और खूब सलाम भेजा करो *📚 पारा 22, सूरह अहज़ाब, आयत 56* *(2)* और हज़रत यहया अलैहिस्सलाम की विलादत पर रब तआला फरमाता है *(2)* और सलामती है उसपर जिस दिन पैदा हुआ और जिस दिन मरेगा और जिस दिन ज़िंदा उठाया जायेगा *📚 पारा 16, सूरह मरियम, आयत 15* *(3)* और हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने तो खुद अपने ऊपर सलाम पढ़ा *(3)* और सलामती है मुझपर जिस दिन मैं पैदा हुआ और जिस दिन मरूं और जिस दिन ज़िंदा उठाया जाऊं *📚 पारा 16, सूरह मरियम, आयत 33* *अगली पोस्ट जल्द......* 👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑 *🏁 मसलके आला हजरत 🔴*