सलातो सलाम पड़ना कैसा है 3⃣
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*🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀*
*💓 पोस्ट 03*
✏️ *(9)* हज़रते मौला अली रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु ने फ़रमाया कि मैं नबीये करीम सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम के हमराह मक्का में था फिर सरकारे अक़दस और मैं मक्का शरीफ के गिर्द अंवाह में गए तो जिस पहाड़ और दरख़्त का भी सामना होता तो वो बा आवाज़ बुलन्द अर्ज़ करता ''अस्सलामो अलैका या रसूल अल्लाह"
*📚 तिर्मिज़ी, जिल्द 2, सफह 203*
*👹 और अब मुनकिर ये कहेगा कि सलाम पढ़ना तो फिर भी ठीक है मगर क़यामे ताज़ीमी हराम है तो ग़ैरुल्लाह की ताज़ीम यानी क़याम पर भी दलील मुलाहज़ा करें*
*(10)* जब हज़रत सअद रज़ी अल्लाहु तआला अन्हु मस्जिदे नबवी शरीफ में दाखिल हुए तो हुज़ूर सल्लललाहो अलैहि वसल्लम ने अनसार को हुक्म दिया की 'क़ूमू इला सय्येदेकुम' यानि अपने सरदार के लिए खड़े हो जाओ
*📚 मिश्क़ात, जिल्द 1, बाबुल जिहाद*
*(11)* ख़ातूने जन्नत हज़रत फ़ातिमा ज़ुहरा रज़ी अल्लाहु तआला अन्हा के आने पर नबी करीम सल्ल्ललाहो तआला अलैही वसल्लम फ़ौरन खड़े हो जाते और आपकी पेशानी चूमकर अपनी मसनद पर बिठाते
*📚 मिश्क़ात, किताबुल अदब, बाबुल मुसाफा*
*👉 अगर क़यामे ताज़ीमी हराम होता तो क्युं नबी अपने सहाबियों को खड़ा होने का हुक्म देते और क्युं खुद अपनी बेटी के आने पर उसकी ताज़ीम करते ज़ाहिर सी बात है कि या तो वहाबियों ने क़ुरानो हदीस पढ़ी ही नहीं और अगर पढ़ी है तो उसका मतलब समझने से क़ासिर रह गए*
*अगली पोस्ट जल्द......*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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