सलातो सलाम पड़ना कैसा है1⃣7⃣
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*🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀*
*💓 पोस्ट 17*
✏️ *लफ्ज़ सिराज अगर चे 2 मायनों में आता है चिराग़ और सूरज मगर यहां मुख़्तार मायने सूरज ही है क्योंकि क़ुर्आन में सूरज का लक़ब सिराज और चांद का लक़ब नूर दूसरी जगह भी आया है फरमाता है*
*कंज़ुल ईमान* और उनमें चांद को रौशन किया और सूरज को चिराग़
*📚 पारा 29,सूरह नूह,आयत 16*
*कंज़ुल ईमान* और उनमें चिराग रखा और चमकता चांद
*📚 पारा ,सूरह फुरक़ान,आयत 61*
*लुग़त में वहज के मायने नूर मय हरारत के है जो रौशन भी हो और गर्म भी हो चुंकि सूरज बेहद रौशन भी है और निहायत गर्म भी इसलिए उसको वहाज कहा गया,लेकिन रूहानी आफताब को सिराज कहकर वहज की जगह मुनीर फरमाया जो कि चांद की सिफत है जिसमे रौशनी तो है मगर गर्म नहीं बल्कि ठंडा है,तो मतलब ये हुआ कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ज़ाते नब्वी में रौशनी तो सूरज सी है मगर ठंडक चांद की है कि अगर ऐसा न होता तो हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के चेहरे पर निगाह रखने की किसी को जुर्रत न होती,सब जानते हैं कि ज़िन्दगी का वुजूद सूरज से भी है अगर उसकी रौशनी और तपिश और हरारत न हो तो न तो दुनिया में रौशनी बाक़ी रहे और न किसी के बदन में हरारत बल्कि सब के सब बर्फ की तरह जम जायें उसी तरह रूहानी ज़िन्दगी और ईमान के लिए भी एक रुहानी सूरज की ज़रूरत है जो हमारे नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम हैं कि अगर आप न हों तो सब खत्म हो जाए,इसीलिए आलाहज़रत ने आपको महरे चर्खे नुबूवत क़रार दिया दूसरी जगह आप लिखते हैं*
*अगली पोस्ट जल्द......*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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