सलातो सलाम पड़ना कैसा है 1⃣2⃣
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*🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀*
*💓 पोस्ट 12*
✏️ *लाखों सलाम* एक लफ्ज़ में लाखों सलाम भेजना ये भी शाने आलाहज़रत है
*इसपर अक्सर मोअतरिज़ ऐतराज़ करता है एक लफ्ज़ में लाखों सलाम कह दिया तो लाखों सलाम पहुंच जायेगा क्या,वैसे तो ऐतराज़ करने वाला हर बात में ही ऐतराज़ करता है क्योंकि उसका काम ही ऐतराज़ करना है और जब बात हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की होती है तब उसका ऐतराज़ कुछ ज़्यादा ही बढ़ जाता है,ऐसे लोगों की मिसाल उल्मा उस मक्खी से देते हैं जो पूरा खूबसूरत जिस्म छोड़कर ज़ख्म पर ही बैठा करती है उसी तरह ये मोअतरिज़ भी सालिहीन की लाखों करोड़ो खूबियों को छोड़कर सिर्फ उन बातों पर जोर देते हैं जिनमें कहीं से उन्हें कोई नुक्स का पहलु मिल जाये,अब जब ऐसा कोई पहलू नहीं निकलता तो लगते हैं मनघडंत बातें बनाने और ऐसी ऐसी बेढंगी बात करते हैं कि जिसका न कोई सर होता है और न पैर कि आदमी सुने तो अपना सर धुनता रहे,जैसे कि बहुत पहले की बात है कि एक साहब ने मुझसे एक हदीस सुनाकर कहा कि हदीस युं थी कि सहाब-ए किराम में से कोई हज़रात हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के दरवाज़े पर दस्तक देते हैं तो अंदर से हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कौन अब वो साहब यहीं रुक गए और कहने लगे कि देखिये आप लोग कहते हैं कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को ग़ैब है अगर उनको ग़ैब होता तो अंदर से ही न जान लेते कि दरवाज़े पर कौन है नहीं जानते थे जब ही तो पूछा कौन है,अस्तग़्फ़िरुल्लाह,अब बताईये कि ये भी कोई ग़ैब की नफ़ी की दलील हुई इसी तरह और भी बे सर पैर की बातें इन खुराफातियों के दिमाग़ में हमेशा चलती रहती है और जहां कोई भोला भाला सुन्नी मिला रख दिया उसके सामने ऐसी ही कोई एक बात और वो बेचारा अगर इल्म होगा तो कुछ बोलेगा वरना या तो चला जायेगा या फिर उसका ईमान उसकी बात सुनकर कमज़ोर हो जायेगा,हां तो मैं कह रहा था कि जब उन्होंने मुझसे ये बात कही तो पहले तो मुझे उनके इल्म पर हंसी आई गुस्सा भी आया पर मैंने उनको जवाब देने के बजाये पहले एक हदीस सुनाई (ये हदीस मैंने अपनी ज़बानी सुनाई आप किताब के हवाले के साथ अगली पोस्ट में मुलाहज़ा फरमायें)*
*अगली पोस्ट जल्द......*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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