दुरूद शरीफ़ भी अल्लाह से दुआ है
🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 दुरूद शरीफ़ भी अल्लाह से दुआ है 🥀* 🔛 दुरूद शरीफ़ जो हुज़ूर सय्यदे आलम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम से इज़हारे मुहब्बत का बेहतरीन तरीक़ा और आप को याद रखने का बेहतरीन ज़रिआ है जो सब से अच्छा वज़ीफा और अमल है। बे शुमार अहादीस इस के फ्ज़ाइल में आईं हैं खुद क़ुरआने करीम में भी इस की ताक़ीद आई है। यह दुरूद शरीफ़ भी अल्लाह से दुआ है और बेहतरीन दुआ है इस के जितने अल्फाज़ व कलिमात हदीसों या बुजुगों से मन्कूल हैं वह "اللهم صل" से शुरू हुये हैं या "صلى الله" से उन सब में अल्लाह तआला से हुज़ूर पर सलाम व रहमत नाज़िल करने की दुआ की जाती है। यानी ऐ अल्लाह हुज़ूर पर रहमत नाज़िल फ़रमा उन पर अल्लाह का सलाम हो... बल्कि मैं समझता हूँ कि दुरूदे पाक की जो अहादीस में बे हिसाब फ़ज़ीलत आई है एक हदीस में यहाँ तक फ़रमाया कि आदमी कोई ज़िक्र न करे कोई वज़ीफा व अमल न पढ़े सिर्फ़ दुरूद शरीफ़ पढ़ता रहे तो यह हर मक़्सद ख़्वाह उख़रवी हो या दुनियावी सब के लिए काफ़ी है इस की वजह यही है कि इस में अल्लाह का ज़िक्र भी है और उस के रसूल का भी यह हर बातिल परस्ती के लिए दो धारी तलवा...