सलातो सलाम पड़ना कैसा है 1⃣8⃣
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*🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀*
*💓 पोस्ट 18*
✏️ *अंबिया अज्ज़ा हैं तू बिल्कुल है जमला नूर का*
*इस इलाक़े से है उन पर नाम सच्चा नूर का*
*ये जो महरो मां पे है इतलाक़ आता नूर का*
*भीख तेरे नाम की है इस्तेआरा नूर का*
*गुले बाग़े रिसालत* किसी भी बाग़ की ज़ीनत उसके फूलों से होती है तो इस दुनियाये बाग़ की ज़ीनत अंबिया अलैहिस्सलाम से है और उन्हीं से इस बाग़ की बहार है मगर खुद बाग़ का वजूद हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की ज़ात से है,आपकी तशरीफ आवरी से पहले बहुत सी बहार आई मगर उन्हें खिज़ा ने आ लिया मगर आपके आने से ऐसी बहार आई कि उसपर खिज़ा का कोई असर न हो सका और आपके ही वजूद अक़दस से बाग़ में ऐसा फूल खिला कि फिर किसी और फूल की ज़रूरत ही न रही और उसी से पूरी बाग़ की रौनक रही कि अल्लाह ने आपको खातिमुन नबिय्यीन बनाकर भेजा,आलाहज़रत अज़ीमुल बरकत रज़ियल्लाहु तआला अन्हु दूसरी जगह युं इरशाद फरमाते हैं
*न रखी गुल के जोशे हुस्न ने गुलशन में जां बाक़ी*
*चटकता फिर कहां गुंचा कोई बाग़े रिसालत का*
*📚 शरह सलामे रज़ा,सफह 72-79*
*अगली पोस्ट जल्द......*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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