सलातो सलाम पड़ना कैसा है 9⃣
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*🥀 सलातो सलाम पड़ना कैसा है 🥀*
*💓 पोस्ट 09*
✏️ चुंकि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम क़यामत तक अपनी उम्मत में मौजूद हैं लिहाज़ा आपके वुजूदे अक़दस की वजह से वैसा अज़ाब कभी इस उम्मत पर नहीं आ सकता जैसा कि पहले की उम्मतों पर आया करता था मेरे आलाहज़रत इसी मक़ाम को याद करते हुए और मुसलमानों को मुबारक बाद देते हुए फरमाते हैं कि
*अंता फ़ीहिम ने अदु को भी लिया दामन में*
*ऐशे जावेद मुबारक तुझे शैदाइये दोस्त*
यानि जब हुज़ूर काफिरों के लिए भी रहमत बनकर आ गए तो फिर उनके ग़ुलामों का क्या कहना और उन्हें क्यों उनकी रहमत का हिस्सा न मिलेगा तो जब कायनात की हर शय के लिए हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम रहमत हैं तो मानना पड़ेगा कि हर शय का वजूद आप ही के वजूद का मरहूने मिन्नत है जैसा कि मैं पीछे बयान कर आया और बहुत कुछ बयान करना बाक़ी है मगर बात बहुत लम्बी हो जायेगी क्योंकि अभी पहले शेअर के पहले मिसरे की भी शरह मुकम्मल नहीं हो पाई है तो आगे बढ़ते हैं
*अगली पोस्ट जल्द......*
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*🏁 मसलके आला हजरत 🔴*
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